Amit Verma, Fashion Editorial Commercial Photographer based in Delhi, 10 years experience of online media, communications and advertising.
Spent five years in mainstream advertising with India Today Associate, Penguin Books, Westland, Hachette India

वही सरद हवा अब चुभने लगी है मुझे…

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दो कदम ही चला था पर जब कदमो को देखा तो
साथ साथ ही थे वो
वक्त तो अपनी ही धुरी पर था
पर मैं ही वक्त के आगे था कही

मुड के देखा वो आँख लगाये पुल पे खढी थी
वो मौसम िक सरद हवा जैसे मेरे िदल मे समा रही थी
िदल ने चाहा जैसे बस
वक्त युही थम जाये कही

वो हाथो मे हाथ ले कर
उस सूरज को दूबते हुए देखा
तो युही ज़`हन मे आया बस
अब एक नयी सुबह होगी

एक वादा िकया जलद िमलने का
साल बीत गया वो आज भी वही है
वही पुल था पर बदले थे िरशते कही
वकत के खेल है िनराले

वही सरद हवा अब चुभने लगी है मुझे

- अिमत



2 Responses to “वही सरद हवा अब चुभने लगी है मुझे…”

  1. avanish Says:

    वकत के खेल है निराले.
    सही कहा. बढिया.

  2. Huma Says:

    wahi sard hawaa ab chubhne lagi hai… sigh… kitni aasaani se keh jaate hain aap hum kahiyon ke mann ki baat…

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