There is nothing around me…
Friday, December 11th, 2009
इस वक़्त तो लगता है कुछ भी नहीं है
महताब ना सूरज ना अन्धेरा ना सवेरा
आँखों के दरीचे में किसी हुस्न की झलक
और दिल की पनाहों में किसी दर्द का डेरा
मुमकिन है कोई वहम हो मुमकिन है सुना हो
गलियों में किसी चाप का एक आखिरी फेरा
साखो में ख्यालों के घने दरख्त की शायद
अब आके करेंगा […]
The virtue of reason, the value of knowledge, and the influence of faith in my own ability to dream and achieve some...Quest of Life