Destination
Monday, October 5th, 2009“भंवर सी घूमती है ये ज़मीं,
रोको भंवर सी घूमती है ये ज़मीं,
रोको उतर के पूछ लूं आखिर मुझे जाना कहाँ तक है!
इसी स्टेशन पे ले आती है ये हर साल मुझको
और रोकती भी नहीं है
जहां जन्म की तारीख़ लिखी है
“भंवर सी घूमती है ये ज़मीं,
रोको भंवर सी घूमती है ये ज़मीं,
रोको उतर के पूछ लूं आखिर मुझे जाना कहाँ तक है!
इसी स्टेशन पे ले आती है ये हर साल मुझको
और रोकती भी नहीं है
जहां जन्म की तारीख़ लिखी है